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क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्यौहार? जान लें इसके पीछे का इतिहास

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आज से शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के 9 दिन बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। मान्यताएं हैं कि जो भी मनुष्य शारदी नवरात्रि के 9 दिनों तक मां दुर्गा की सच्चे मन और दिल से पूजा करता है, उससे मां दुर्गा प्रसन्न होती है और उसे मनचाहा आशीर्वाद देती है, जिससे इंसान की हर एक मनोकामना पूरी होती है। नवरात्रि का त्यौहार पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। हर एक शहर हर एक राज्य में माता रानी का पंडाल सजाया जाता है और 9 दिनों तक माता रानी की पूजा अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार नवरात्रि का त्योहार शरद ऋतु में अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है।

इस बार शारदी नवरात्रि के त्यौहार की शुरुआत आज यानी 7 अक्टूबर से हो रही है। और अगले 8 दिनों तक माता रानी की पूजा की जाएगी क्योंकि इस बार दो तिथियां एक साथ पड़ गई हैं जिसके चलते इस बार की नवरात्रि 8 दिन की है।

शारदीय नवरात्रि के इतिहास के बारे में बताने से पहले हम आपको यह बता दें कि साल भर में 2 बार नवरात्रि का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। पहली चैत्र नवरात्रि और दूसरी शारदीय नवरात्रि। शारदीय नवरात्री अधर्म और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक मानी जाती है। नवरात्रि को मनाने के पीछे शास्त्रों में दो पौराणिक कथाएं बड़ी प्रचलित आइए हम आसान भाषा में नवरात्रि के पौराणिक इतिहास और महत्व को समझने की कोशिश करते हैं।

महिषासुर नामक राक्षस का नाम तो आपने सुना ही होगा। महिषासुर ने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की महिषासुर की तपस्या से ब्रह्मा जी खुश हुए और उन्होंने महिषासुर से कहा कि उसे जो भी वरदान चाहिए वह‌ मांग सकता है। महिषासुर ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा। लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा “जो इस संसार में पैदा हुआ है उसकी मौत निश्चित है इसीलिए जीवन और मृत्यु को छोड़कर तुम जो चाहे वह मांग सकते हो।”

इसके बाद महिषासुर ने कहा ‘ठीक है प्रभु तो आप मुझे ऐसा वरदान दीजिए की ना तो किसी देवता या असुर के हाथों और ना ही किसी मानव के हाथों मेरी मृत्यु हो। मेरी मृत्यु सिर्फ स्त्री के हाथों ही।’ ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह दिया।

ब्रह्मा जी से आशीर्वाद पाने के बाद महिषासुर ने पृथ्वी पर आतंक राज कायम कर दिया और राक्षसों का राजा बन गया यहां तक कि उसने देवताओं पर भी आक्रमण कर दिया। महिषासुर के आतंक से देवी देवता सब घबरा गए। सभी देवताओं ने मिलकर महिषासुर से युद्ध किया लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा और देखते ही देखते देव लोग पर भी महिषासुर का राज हो गया।

 महिषासुर के राज को खत्म करने के लिए देवलोक के देवी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ मिलकर आदिशक्ति की पूजा-आराधना की। कड़ी पूजा आराधना के बाद सभी देवताओं के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिससे एक खूबसूरत अप्सरा का जन्म हुआ। जिसे देवी दुर्गा का रूप कहा गया। देवी दुर्गा का रूप देखकर महिषासुर उन पर मोहित हो गया और महिषासुर ने देवी दुर्गा से शादी करने का प्रस्ताव रखा। देवी दुर्गा बार-बार मना करती रही। अंत में उन्होंने महिषासुर के शादी वाले प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया लेकिन उन्होंने महिषासुर के सामने एक शर्त भी रखी। देवी दुर्गा ने कहा कि महिषासुर को उनके साथ युद्ध करना पड़ेगा अगर वह युद्ध में जीत गया तो देवी दुर्गा उससे शादी कर लेंगी। महिषासुर ने देवी दुर्गा से शादी करने के लिए उनसे युद्ध करने के लिए हामी भर दी। 9 दिनों तक महिषासुर और देवी दुर्गा के बीच भयंकर युद्ध चला दसवे दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर राक्षस राज को खत्म कर दिया और तभी से नवरात्रि मनाने की परंपरा या कहें तभी से नवरात्रि का पर्व मनाया जाने लगा।

वहीं अगर हम दूसरी पौराणिक कथा की बात करें तो तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम में 9 दिनों तक मां दुर्गा की पूजा अर्चना की थी। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पूजा अर्चना से माता दुर्गा प्रसन्न हुई थी और उन्होंने भगवान श्रीराम को जीत का आशीर्वाद दिया था और इसी आशीर्वाद की की वजह से भगवान राम ने दसवें दिन युद्ध में रावण का वध कर विजय प्राप्त की थी। इसीलिए इस तिथि को विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है।

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