कोरोना की लहर, सरकार के कदम, लोगों में दहशत, …. कैसे रहा है कोरोना का अब तक का सफ़र

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‘कोरोना’ बीते 2 सालों में इस शब्द ने मानव जाति को कई वर्ष पीछे धकेलने का काम किया है। वैसे तो, इस महामारी को ‘कोविड-19’ नाम दिया गया है लेकिन  दुनिया ने इसे कोरोना के नाम से ही पहचाना। भारत में भी  ज्यादातर लोगों ने महामारी कोविड-19 नामक इस कोरोना वायरस को ‘कोरोना वायरस” के नाम से ही बुलाया है और अभी बुला भी रहे हैं।

इस महामारी ने भारत को अनेकों ज़ख्म दिए हैं, जिन जख्मों से उबरना बेहद कठिन रहा है। अभी कोरोना की पहली और दूसरी लहर के ज़ख्म भरे भी नहीं हैं की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है।

थोड़ा पीछे चलते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि आख़िर भारत सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए जो कदम अब तक उठाए हैं उनका क्या प्रभाव रहा है।

जैसा की हम सब जानते हैं की भारत में कोवीड-19 नामक कोरोना वायरस का पहला केस 30 जनवरी 2020 को केरल राज्य में पाया गया। फिर धीरे-धीरे भारत में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने लगी। देखते ही देखते हम जनवरी से मार्च के महीने में प्रवेश कर चुके थे। कोरोना के संक्रमण में तेजी आ चुकी थी। 19 मार्च को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन दिया और लोगों से 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के लिए आग्रह किया। देशवासियों ने पीएम मोदी के आग्रह को मानते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का पालन किया। 24 मार्च को प्रधानमंत्री ने देश को फिर संबोधित किया और इस बार चौंकाने वाला फ़ैसला अपने संबोधन में जनता को सुनाया। पीएम मोदी ने 21 दिनों के पूर्ण लॉकडाउन का ऐलान किया। जो जहां था, वहीं जम गया। लोगों में अफरा तफरी का माहौल बन गया था। लोग डर गए थे।  ऐसे ही चार बार लॉकडाउन को बढ़ाया गया। पहला लॉकडाउन 21 दिनों का 24 मार्च से 14 अप्रैल तक, दूसरा लॉकडाउन 19 दिनों के लिए (15 अप्रैल से 3 मई तक), तीसरा लॉकडाउन 14 दिनों के लिए (4 मई से 17 मई तक) और चौथा लॉकडाउन 14 दिनों का (18 मई से 31 मई तक) और पांचवा लॉकडाउन  30 दिनों के लिए (1 जून से 30 जून तक)। भारत में 24 मार्च 2020 से लेकर 30 जून 2020 तक पूर्ण लॉकडाउन था। अचानक से लॉकडाउन का ऐलान और फिर लगातार लॉकडाउन को बढ़ाए जानें से भारत की जनता की कमर टूट चुकी थी। मजदूर, गरीब तबका, लेबर, रोजमर्रा का काम कर जीवन यापन करने वाले, लघु व्यापारी, दूसरे शहरों में मजदूरी करने गए लोग सब बुरी तरह फंसे थे। यहां तक लोग खाने को तरस गए थे। लोगों ने शहरों से गावों की तरफ पलायन कर दिया था। सरकार ने ट्रेनों के जरिए लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का काम किया। लोग इतने थे की ट्रेन और बसें कम पड़ गई। लोग पैदल ही   नगरों से अपने गांव की ओर पलायन कर चुके थे। एक तरफ़ कोरोना से मौत और संक्रमण का ग्राफ बढ़ रहा था तो दूसरी तरफ़ दो वक्त क्या एक वक्त की रोटी के लिए लोग तड़प रहे थे। सरकार ने लोगों को मुफ़्त में अनाज मुहैया कराया।  सरकार की तरफ से लोगों को खाने की सामग्री पहुंचाई गई। लोगों के बैंक खातों में सरकार की तरफ से मदद राशि पहुंचाई गई।  धीरे-धीरे करके जन-जीवन पटरी पर लौटा रहा था। लेकिन अब नई मुसीबत आ चुकी थी। लाखों करोड़ों लोग बेरोजगार हो चुके थे।  भारतीय रेलवे के  167 साल के इतिहास में पहली बार उसके पहिए रुके थे। स्थिति बहुत भयावह थी। सरकार ने धीरे-धीरे करके जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए लॉकडाउन में ढिलाई की। नवंबर दिसंबर तक स्थिति पहले से थोड़ा बेहतर हो चुकी थी। तब तक बहुत कुछ बदल चुका था। हमारी अर्थव्यवस्था से लेकर जीवन जीने के तरीक़े में जमीन आसमान का फर्क साफ़ दिखने लगा था। 

 धीर धीरे सामान्य जन जीवन पटरी पर लौट रहा था। भारत में 16 जनवरी 2021 से वैक्सीनेशन की भी शुरुआत हो चुकी थी। पहले हेल्थ और फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई गई। वैक्सीनेशन ड्राइव को लेकर भी सरकार को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। वैक्सीनेशन की शुरुआत हो चुकी थी। लेकिन फिर धीर धीरे कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी थी। भारत कोरोना की दूसरी लहर से अंजान था। अप्रैल- मई 2021 में भारत में कोविड 19 से हाहाकार मचा था। एक दीन में कोरोना वायरस के 3-3, 4-4 लाख नए केस सामने आ रहे थे और हजारों लोग दम तोड़ रहे थे। अस्पताल और बेड कोरोना के मरीजों के लिए कम पड़ गए थे। दूसरी वेव के दौरान ऑक्सीजन की कमी और अस्पतालों की कमी प्रमुख रूप से सामने आई। केंद्र और राज्य सरकारों ने अपनी तरफ से तमाम कोशिशें की, विदेशों से ऑक्सीजन मंगवाई गई लेकिन ऑक्सिजन की किल्लत और अस्पतालों में बेड की कमी तभी दूर हो पाई जब कोरोना की दूसरी लहर कमजोर हुई।

 वैक्सीन को लेकर लोगों में गलतफहमी थी। लोगों को लग रहा था की वैक्सीन लगवाने से उनकी मौत हो जायेगी। वैक्सीन को लेकर कई तरह की अफवाहें सोशल मीडिया पर उड़ रही थी। इन अफवाहों को गलत साबित कर लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए सरकार की तरफ से कई तरह के कदम उठाए गए। लोगों को जागरूक करने के लिए सरकार ने कैंपेन चलाए। धीरे-धीरे करके सरकार ने लोगों को यह विश्वास दिलाने में कामयाब रही की अगर कोरोना से बचना है तो वैक्सीन लगवाना जरूरी है। पिछले 1 साल में भारत में कोविड 19  वैक्सीन की 157 करोड़ डोज लगाई जा चुकी है। भारत में वैक्सीनेशन तो तेजी के साथ किया जा रहा है लेकिन कोरोना संक्रमण के नए वैरिएंट ऑमिक्रोन के मामले एक बार फिर से चिंता बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है की तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है। सरकार का दावा है कि सरकार कोविड-19 की तीसरी लहर से निपटने के लिए तैयार है। लगभग 135 करोड़ की आबादी वाले देश ने अपने तरीके से जिस तरह से कोरोना से निपटना चाहिए था उस तरह से निपटने का काम किया है। भारत के कोविड प्लान को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाओं ने तारीफ़ की। महामारी कोविड -19 से  विकसित देशों का हाल इतना बुरा था की पूछिए ही ना। भारत जैसे विकासशील देश ने जिस तरह से इस महामारी को काबू करने के जो भी प्रयास किए, जो भी कदम उठाए वो कितना प्रभावी रहे इसका अंदाज समय की स्थिति को देखते हुए आप भी लगा सकते हैं।

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