शराब के गुणा गणित से परेशान है बिहार… सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार सरकार को लगाई है फटकार

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बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली सरकार ने अप्रैल 2016 में राज्य में शराब के सेवन और जमा करने पर प्रतिबंध लगाया था।  इससे पहले भी  कर्पूरी ठाकुर की सरकार ने बिहार में 1977 में शराब बंदी लगाई थी। लेकीन 1.5 साल के बाद सराकर को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था।

शराबबंदी की वजह से ही नीतीश कुमार ने 2020 का विधानसभा चुनाव जीता था। लेकीन अब यही शराबबंदी नीतीश सरकार पर भारी पड़ रही है। दरअसल, शराबबंदी के बावजूद बिहार में शराब की काला बाजारी हो रही है जिसे नीतीश कुमार की सरकार नहीं रोक पा रही है। ताज़ा विभागीय आंकड़ों की बात करें तो जनवरी 2021 से लेकर अक्टूबर 2021 तक बिहार में 38 लाख लीटर से अधिक की शराब पकड़ी गई है। और 62 हजार लोगों को शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। कानून बनने के बाद यानी अप्रैल 2016 के बाद से अब तक लगभग 3 लाख से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां इस कानून के तहत हो चुकी हैं।  इतना ही नहीं जहरीली शराब पीने से सैकड़ों लोगों की मौत भी हुई है। कहीं ना कहीं  ये आंकड़े नीतीश सरकार को  कटघरे में खड़ा करते नज़र आ रहे हैं।

शराबबंदी से जुड़े मुकदमों को लेकर बिहार सरकार की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि पटना हाई कोर्ट के 15 से 16 जज शराबबंदी का मुकदमा ही देखते रहते हैं उन्हें दूसरे मुकदमों को देखने का समय ही नहीं मिल रहा है।  कोर्ट ने ये भी कहा है कि ऐसे कानून बनाते समय  मसौदा तैयार करने में दूरदर्शिता की कमी होती है।

मोटा मोटा आपको बताते चलें की शराबदबंदी के चलते बिहार सरकार के राजस्व में शराबांदी के पहले के मुकाबले शराबबंदी के बाद लगभग 15 से 20 प्रतिशत (प्रत्येक वर्ष लगभग 4 हजार से 5 हज़ार करोड़ रुपए) का घाटा उठाना पड़ रहा  है। सिर्फ सरकार के ख़ज़ाने में कमी नहीं आई है जो देशी शराब बनाकर बेचकर जीवन यापन करते थे उनका रोजगार भी गया है। सरकार को इनके लिए भी कुछ करना चाहिए।

जेडीयू के साथ सरकार में शामिल भाजपा ने भी पिछले वर्ष इस कानून की समीक्षा करने के मांग की थी।  जिसके बाद मुख्य्मंत्री नीतीश कुमार ने समीक्षा की थी। समीक्षा में कुछ कड़े फैसले लिए गए।  फिर भी स्थिति वैसी की वैसी ही नज़र आ रही है।

सरकार को लोगों को जागरूक करने की जरुरत है। सरकार को पहले लोगों को ये विश्वास दिलाना ही होगा की शराब उनके जीवन के लिए कितनी घातक है तभी बात बन सकती है नहीं तो नहीं। 

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